अंबिकापुर। नगर के प्रतापपुर रोड में स्थित एक नर्सिंग होम में महिला की मौत के बाद हंगामे की स्थिति बन गई। चिकित्सक की लापरवाही से मौत का आरोप लगा स्वजनों ने न सिर्फ हंगामा मचाया बल्कि तोडफ़ोड़ भी की। सूचना मिलने पर कोतवाली टीआई भारद्वाज सिंह अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे और उन्होंने मृत महिला के स्वजनों को समझाइश देने का प्रयास किया। घटना से स्वजन व्यथित हैं, उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के मुताबिक कोरिया जिले के चिरमिरी की अंजना जायसवाल पति आकाश जायसवाल 27 वर्ष लगभग ढाई माह की गर्भवती थी। स्वजन उसे जांच के लिए दस दिन पहले अंबिकापुर के एक नर्सिंग होम में लाए थे। यहां जांच के बाद चिकित्सक ने बताया कि मां जो खाना खा रही है, उसे बच्चा नहीं खा पा रहा है। ऐसे में उन्होंने महिला की जान की सलामती के लिए एबार्शन कराने की सलाह दी थी। एबार्शन कराने के बाद महिला को लेकर स्वजन घर चले गए थे। पुन: शारीरिक पीड़ा महसूस होने पर वे अंजना को लेकर नर्सिंग होम अंबिकापुर पहुंचे। स्वजन रामकुमार जायसवाल का कहना है कि जो लड़की घर से आराम से अंबिकापुर तक आई, समधी के यहां रूके किसी प्रकार की ऐसी तकलीफ नहीं हुई कि इमरजेंसी की स्थिति बने, इस परिस्थिति में उसकी मौत कहीं न कहीं चिकित्सक की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि यहां पुन: जांच के बाद चिकित्सक ने बताया था कि एबार्शन में पूरी सफाई नहीं हो पाई है, बच्चे का कुछ अंश बचा है, उसे निकालना पड़ेगा। इसके बाद दोपहर 1.25 बजे उसे सफाई के लिए अंदर लेकर गए, इस दौरान उसकी पीड़ा बढ़ गई और वह छटपटा रही थी। अंदर उपचार में लगे लोगों के द्वारा कॉपरेट करने कहा गया, लेकिन उसकी पीड़ा काफी बढ़ गई थी। इसके बाद लड़की को बेहोश करके गर्भाशय में मौजूद अवशेषों को साफ करने कहा गया, इसी बीच उसकी मौत की खबर अचानक सुनने को मिली। उन्हें जब इसकी खबर मिली तो सहज विश्वास नहीं हुआ कि आंतरिक परेशानी को दूर कराने जिस लड़की को वे सकुशल लेकर आए थे, उसका शव लेकर जाना पड़ेगा। गुस्साए स्वजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल से मिली हंगामे की खबर पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भारद्वाज सिंह अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे और मौत से बौखलाए स्वजनों को शांत कराया। रामकुमार जायसवाल ने मामले में पूरा दोष अस्पताल प्रबंधन पर मढ़ते हुए चिकित्सक के विरूद्ध अपराध दर्ज करने की मांग की है।
चिकित्सक ने कहा-
महिला की मौत को लेकर नर्सिंग होम के संचालक डॉ.राजेंद्र परीडा का कहना है कि अंजना जायसवाल को स्वजन उनके नर्सिंग होम में लाए थे। वह सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत बता रही थी। इलाज के दौरान अचानक उसका ब्लड प्रेशर और पल्स कम होने लगा। पेशेंट को रिवाइव करने की अपने सहयोगियों के साथ उन्होंने पूरी कोशिश की। इस बीच एक बार पेशेंट उठ गई, उससे बातचीत भी हुई। सामान्य होने पर उसे लेट जाने के लिए कहा। पुन: उसका पल्स कम होने लगा और उसे संभालने का समय ही नहीं मिल पाया, जिससे उसकी मौत हो गई। यह स्वजनों के लिए ही नहीं उनके स्वयं के लिए बड़ी क्षति है।
लापरवाही का स्वजनों ने लगाया आरोप-भारद्वाज सिंह
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भारद्वाज सिंह ने बताया कि चिरमिरी की अंजना जायसवाल पति आकाश जायसवाल 27 वर्ष को इलाज के लिए स्वजन लेकर परीडा नर्सिंग होम में आए थे। महिला गर्भवती थी, जांच के बाद बच्चे की हालत सही नहीं बताई गई। डॉक्टर ने एबार्शन की सलाह दी थी। एबार्शन करा महिला को घर ले गए थे। पुन: कुछ दिक्कत होने पर उसे चिकित्सक के पास लेकर आए। महिला का सोनोग्राफी कराया गया, तो पता चला कि बच्चे का कुछ अंश अंदर ही रह गया है, जिससे तकलीफ हो रही है। डॉक्टर ने फिर से एबार्शन करने कहा। इसी दौरान उसकी मौत हो गई, जिस पर स्वजन चिकित्सक की लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
डॉक्टरों की टीम से कराएंगे पोस्टमार्टम-
कोतवाली प्रभारी भारद्वाज सिंह ने कहा कि मामला गंभीर है। स्वजनों के द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को देखते हुए वे मृतिका का पोस्टमार्टम कराएंगे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर ही अग्रिम कार्रवाई क्या होनी चाहिए यह तय हो पाएगा।

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