जानिए बाबा बच्छराज कुंवर के बारे में डॉक्टर दिनेश यादव की कलम से…

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रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- श्री बच्छराज कुंवर बाबा का स्थान बलरामपुर से लगभग 48 किलोमीटर, रामानुजगंज से लगभग 48 किलोमीटर, प्रतापपुर से लगभग 48 किलोमीटर एवं वाड्रफनगर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । प्रकृति के सुरम्य गोद में वन प्रांतरो के मध्य स्थित है।  यहां कल – कल करते नीले जल के झरने मनमोहक है ये  स्थान प्रकृति के अनुपम संग्रह से आच्छादित है
                      

        श्री बच्छराज कुंवर बाबा को वंशराज कुंवर बाबा के नाम से भी जानते हैं । इन्हें वंशवृक्ष को निरंतर गति प्रदान करने वाले देव भी कहते हैं। यहां पर स्थित शिलालेखों के आधार पर ईसा पूर्व  एक राजा का राजमहल का निर्माण किया जा रहा था। इस निर्माण के पूर्व भगवान शंकर, माँ पर्वती एवं शेषनाग की स्थापना की गई थी । इसी मध्य किसी दूसरे राजा के सैनिकों के द्वारा मूर्तियों को खंडित किया गया । निर्माणाधीन राजमहल को ध्वस्त किया गया।  इस स्थान से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर पत्थरों के मध्य संकीर्ण रास्ते से होकर चढ़ाई चढ़ते हुए राजमहल के निर्माणाधीन स्थान पर पहुंचा जा सकता है ।यहां विशाल प्रांगण ईटों द्वारा निर्माणाधीन दीवार विद्यमान है। मुख्य द्वार पर शिलालेख भी दृष्टव्य है। इसी स्थान पर रानी द्वारा दही मंथन की मुद्रा परिलक्षित है। शत्रु के सैनिकों के द्वारा मूर्तियों को खंडित कर नष्ट भ्रष्ट किया गया प्रतीत होता है । आज भी दही का मटकी , मथनी  खंडित रानी की मूर्ति विद्यमान है ।इस प्रांगण में पैदल चलने से ऐसा प्रतीत होता है कि इसके नीचे कोई किला  या रिक्त स्थान है। जिससे धम्म- धम्म की आवाज महसूस होता है। यह प्रांगण ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने से लगभग 5 किलोमीटर तक चारों और स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जो सामरिक रूप से अति महत्वपूर्ण है । श्री बच्छराज कुंवर बाबा की खंडित मूर्ति को समीप से दृष्टिगोचर करने पर स्पष्ट है कि गले से नाग  एवं मुकुट पर चंद्रमा है। जो भगवान शंकर के साथ ही विद्यमान होते हैं , अर्थात ये शंकर भगवान की ही मूर्ति है । यहीं से बायीं ओर एक विशाल शिवलिंग की स्थापना भी हुई है । कुछ दूरी पर कई तालाब की आकृति भी निर्मित है जिसे शिलाओं द्वारा चारों ओर से बनाया गया है ।यहां एक प्राचीन कालीन सुरंग भी है जो लगभग 12 किलोमीटर तक रजखेता की ओर जाता है । जो वर्तमान में अपभ्रंश के रूप में दृष्टव्य है।

श्री बच्छराज कुँवर बाबा इस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में प्रसिद्ध है ।इनकी ख्याति इतनी अधिक है कि भक्त 200 किलोमीटर की दूरी तय कर दर्शन हेतु आते हैं ,क्षेत्रवासी अपने अनेकों प्रकार की मन्नतों को मानते हैं । अपने मनोकामना पूर्ण होने पर प्रसन्न होकर बकरा का बली चढ़ाते हैं । मानपुर ग्राम का बैगा परिवार ही इनके मुख्य पुजारी है ।जो वंशानुक्रम से यहां पूजा-अर्चना सेवा भाव  करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ रात्रि में कोई भी व्यक्ति नहीं रह सकता है। रात्रि विश्राम करने पर या तो विछिप्त हो जाता है या तो  स्वर्गलोक सिधार जाता है। जिससे रात्रि विश्राम यहां प्रतिबंधित है।

आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती राजमोहनी देवी (राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित) यहां बलीप्रथा को अवरुद्ध करने की कोशिश की थी परंतु एक सप्ताह के अंदर ही अवरुद्ध करने वाले लोगों की मानसिक स्थिति विकृत हो गई , मृत्यु हो गई तबीयत खराब हो गया जिससे वे लोग भाग खड़े हुए ।इसके पश्चात पुनः बलि प्रथा अनवरत संचालित है। वर्तमान में यहां एक ट्रस्ट का गठन किया गया है जो यहां के विकास हेतु, संचालन, निरीक्षण नियंत्रण, परिचालन करती है। प्रतिदिन यहां प्रातः काल से पूजा-पाठ होता है। भक्तों का सैलाब उमड़ते रहता है।
श्री बच्छराज कुँवर बाबा एक शक्तिशाली देव है।जिन्हें लोग युगों-युगों तक  अपने विश्वास, उन्नति,समृद्धि, सुरक्षा का प्रतीक के रूप में मान्यता देते रहेंगे।

डॉ. दिनेश यादव