*देशहित में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए सुझावों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का जवाब स्तरहीन बातें कुटिलता और अभिमान से भरा हुआ – कांग्रेस*

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रायपुर। 19 अप्रेल 2021। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि सभ्यता और शालीनता के साथ देशहित में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए सुझावों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का जवाब स्तरहीन बातों कुटिलता और अभिमान से भरा हुआ है। डॉक्टर हर्षवर्धन का जवाब देश के पूर्व तरह विफल और नाकाबिल स्वास्थ्यमंत्री का गैर जिम्मेदाराना और अहंकारी जवाब है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि आपदा में राजनीति का अवसर तलाश करने वाली भाजपा का चेहरा लोगो से छुपा नहीं है। डॉ हर्षवर्धन का जवाब द्वेष और ओछी राजनीति से प्रेरित है। देश करोना महामारी के संकट का सामना कर रहा है। इस संकट केे सम एक सज्जन व्यक्ति द्वारा देशहित में दिए गए सकारात्मक सुझावो  का अनादर करने के लिए देश कभी प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को माफ नहीं करेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के सुझावों के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने जो कहा वो उनकी अनाधिकार चेष्टा होने के साथ-साथ अभिमान से भरा हुआ दुर्भाग्यपूर्ण उत्तर है । शायद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने यह रिपोर्ट नहीं पढ़ी है कि गैर भाजपा शासित राज्य वैक्सीनशन ड्राइव भाजपा शासित राज्यो से बहुत अच्छा काम कर रही। स्वयं एक चिकित्सक होने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के पत्र में तथ्यों को दरकिनार कर राजनीति का माध्यम बनाना बेहद गलत और आपत्तिजनक है है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि कोरोना महामारी पर नियंत्रण पाने में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डॉ हर्षवर्धन और प्रधानमंत्री के रूप में मोदी विफल साबित हुए हैं। आज देश में रेम्सडीवीर और कोविड-19 वैक्सीन की भरपूर उत्पादन क्षमता होने के बावजूद यदि देशवासी इनके अभाव का सामना कर रहे हैं तो इसके लिए केवल और केवल नरेंद्र मोदी और डॉक्टर हर्षवर्धन की गलत नीतियां उत्तरदायी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि डॉक्टर हर्षवर्धन के जवाब में करोना महामारी की समस्या के समाधान के लिए देश के प्रधानमंत्री रहे जाने-माने अर्थशास्त्री और विद्वान डॉ मनमोहन सिंह के सुझावों को लेकर और समझ कर क्रियान्वित करने का विवेक और गरिमा नहीं है। यह जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और एक चिकित्सक की गरिमा के अनुरूप नहीं है। डॉक्टर हर्षवर्धन का जवाब पढने के बाद देश को यह पता चल गया है की करो ना महामारी की समस्या का इतना व्यापक रूप धारण करने के पीछे क्या कारण है और कौन सी मानसिकता है ? जिस नेतृत्व ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए घंटे बजवाए थाली और ताली बजवाई रात 9:09 पर लाइट बंद करके मोबाइल की लाइट जलाने के लिए देश से कहा, उस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से ऐसे ही निम्न स्तरीय उत्तर की अपेक्षा की जा सकती है।