खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सुपुत्र जयवर्धन सिंह के साथ ली जनसभाएं*

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राजगढ़। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने आज मध्यप्रदेश के ग्राम तोड़ी में जयवर्धन सिंह के साथ जनसभाओं में शामिल हुए। जयवर्धन सिंह मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सुपुत्र हैं। छत्तीसगढ़ के मंत्री अमरजीत भगत को मध्यप्रदेश के राजगढ़ का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जनादेश कांग्रेस सरकार को मिला था, लेकिन कुछ लोगों ने अति राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते जनादेश का अपमान किया, जिससे पूर्ण बहुमत की सरकार गिर गई। ग्राम तोड़ा, ब्यौवरा विधानसभा के अंतर्गत आता है, पूर्व विधायक श्री गोवर्धन दांगी के निधन से यह सीट रिक्त हुई है। यहाँ से रामचंद्र दांगी कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी हैं, जिनके प्रचार हेतु मंत्री अमरजीत भगत गए हुए हैं।चुनाव प्रचार के दौरान मंत्री अमरजीत भगत ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर बरसे।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चुनाव से पहले मोदी जी किसानों की आय दुगुनी करने की बात करते हैं, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने की बात करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वो शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों पर आ जाते हैं।“उन्होंने आगे कहा, “शांता कुमार कमेटी ने सिफारिश की है, छत्तीसगढ़ से धान की खरीदी नहीं करना है, मध्यप्रदेश से गेंहू चावल की खरीदी नहीं करना है।“उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि शांता कुमार कमेटी उन्हीं राज्यों से उपज के उपार्जन की बात कर रही है जहाँ अभी चुनाव होने वाले हैं। गौरतलब है कि शांताकुमार कमेटी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गठित की। साथ ही उन्होंने नोटबंदी, आधी-अधूरी जीएसटी, अनियोजित लॉकडाउन को लेकर केंद्र सरकार की जमकर खिंचाई की। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी भाजपा की खिंचाई की कि जिस समय कोरोना दस्तक दे रहा था तब उपचार की व्यवस्था करने की बजाए भाजपा मध्यप्रदेश में सरकार गिराने के खेल में लगी हुई थी। मंत्री भगत ने इस बात पर भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को आड़े हाथों लिया कि कोरोना को रोकने की बजाय सरकार अस्थिर करने के लिये भाजपा ने मध्यप्रदेश के मंत्रियों को कर्नाटक ले जाकर रखा। इसके बाद उन्होंने रामचंद्र दांगी जी के पक्ष में मतदान करने की अपील के साथ अपनी बात खत्म की। इस दौरान कांग्रेस के जयवर्धन सिंह के साथ-साथ विभिन्न पदाधिकारी व अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।