वन विकास निगम के जंगल में अतिक्रमण धार्रियों ने झाला झोपड़ी बनाकर जमाया डेरा..

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ग्रामीणों ने वन विकास निगम के ऊपर लगाया लापरवाही का आरोप

प्रेमनगर(पप्पू यादव)- सरगुजा परियोजना मण्डल अम्बिकापुर के परियोजना परीक्षेत्र उदयपुर में वन विकास निगम के कपार्ट मेन्ट 1949,1950, 1938 में बहुत तेज गति से अतिक्रमण किया जा रहा है कम्पार्टमेंट 1949,1950 में तो पचासों हेक्टेयर हरे-भरे पौधों को काटकर रेगिस्तान बना दिया गया है नदी नाले बड़े-बड़े बांध में तब्दील कर दिए गए हैं लेकिन वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी इस सम्बंध में कोई ध्यान नही दे रहे हैं जबकि वन विकास निगम के द्वारा उक्त वन भूमि पर शासन के करोड़ो रूपये खर्च कर सागौन का पौधा रोपण कराया था पौधा भी बहुत तेज गति से बढ़ रहे थे जिसे अतिक्रमण कारियों ने पौधे को काटकर नष्ट कर दिया लेकिन वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी कोई ध्यान नही दे रहे हैं इसी प्रकार से कम्पार्ट मेन्ट 1938 में बड़े बड़े बांध बांध बड़े बड़े घर झाला झोपड़ी बनाकर कुछ लोग अतिक्रमण करने में लगे हुवे हैं इस संबंध में वन विकास निगम के मण्डल प्रबंधक एव कलेक्टर जिला सूरजपुर को आवेदन किया गया लेकिन वन विकास निगम के अधिकारियों ने इस सम्बंध में कोई ध्यान नही दिया ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाने के संबंध में धरना प्रदर्शन भी किया और वन विकास निगम के द्वारा ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि एक सप्ताह के अंदर सभी अतिक्रमण को हटाते हुवे अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्यवाही किया जाएगा लेकिन वन विकास निगम के द्वारा आज तक अतिक्रमण नही हटाया गया जिससे अतिक्रमण करने वालों का मनोबल और अत्यधिक बढ़ चुका है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विकास निगम के अधिकारी कर्मचारी कभी जंगल मे डयूटी नही आते हैं चौकीदार तक वन विकास निगम के जंगल को झांकने तक नही आते हैं और कभी आते भी हैं तो अतिक्रमण करने वालों के झाला झोपड़ी में जाते हैं और आराम करते हैं जिससे ग्रामीणों को शक है कि वन विकास निगम के अधिकारियों कर्मचारियों के सह से इतने बड़े अतिक्रमण हो रहा है यही कारण है कि हमारा हरा भरा पर्यावरण दिनों दिन समाप्त की ओर है ग्रामीणों ने बचाने के कई उपाय किये जब रेगुलर फारेस्ट के अंतर्गत यह जंगल रहता था तो पूरे ग्राम पंचायत महेशपुर के ग्रामीणों ने मिलकर जंगल को अतिक्रमण मुक्त किया था लेकिन जबसे वन विकास निगम में यह जंगल को दिया गया तब से अतिक्रमण करने वालों ने फिर सक्रियता दिखाने लगे हैं।
जंगल नष्ट होने का महत्वपूर्ण बात यह है कि दिन प्रतिदिन नए अतिक्रमण करने में लगे हुवे हैं लेकिन नए अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कोई आज तक वन विकास निगम के द्वारा कड़ी कार्यवाही नही किया गया जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ी हुई है।

वन विकास निगम के कर्मचारियों ने अपने जंगल मे हो रहे अतिक्रमण के सम्बंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी नही देते हैं अगर उच्च स्तर की जांच हो तो जिन बीटों में अतिक्रमण हो रहा है उसमें कार्यरत वनविकास निगम के अधिकारी कर्मचारीयों के कार्यशैली के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो सकती है। ग्रामीणों ने वन विकास निगम के उच्च अधिकारियों से जांच कर उचित कार्यवाही करने की मांग कही गई है जिससे अतिक्रमण पूरी तरह से रोक लगाया जा सके।

वन विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भाषा पुरानी हो चुकी हैअतिक्रमण हटाने के संबंध में परियोजना परिक्षेत्र उदय पुर के रेन्जर डी के नेताम जी का दो तीन रेंज प्रभार में है इस लिए ये अपने सभी रेंज का देखभाल नही कर पाते यही कारण है कि वन विकास निगम कारपोरेशन के जंगल मे तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है और जंगल समाप्ति की ओर है यही हालात रहा तो वनविकास निगम के समस्त बीट दो सालों में रेगिस्तान में तब्दील हो जाएंगे।

इस अतिक्रमण के संबंध में जानकारी के लिए डिप्टी रेंजर समुन्दर साय पैकरा से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने ने अतिक्रमण हटाने की बात कही है और रेन्जर डी.के नेताम का फोन कवरेज से बाहर बताया जिससे इसके संबंध में कोई सम्पर्क नही हो पाया।