रायपुर एवं छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से में 22 सितंबर से 1 हफ्ते का लॉकडाउन होने वाला है कितना फायदा होगा इस इस लॉक डाउन का..?छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी

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इस संदर्भ में हमारे कुछ बेहद बुनियादी सवाल है–

1क्या लॉकडाउन से कोविड-19 संक्रमण नियंत्रित हो जाएगा?

2 क्या लॉक डाउन ऐसा इलाज नहीं जो बीमारी से ज्यादा तकलीफ दायक?

3 पिछले लगभग 2 महीनों के लॉकडाउन से हमें क्या फायदे हुए; इसका आकलन सरकार कब करेगी?

4 लॉक डाउन का मुख्य उद्देश्य इंफेक्शन की चेन को तोड़ना तथा इलाज की उचित व्यवस्था तैयार करना होता है। क्या हम पिछले 6 महीनों में यह कर पाए ?
हमारे प्रदेश में मरीजों की पर्याप्त जांच की सुविधा आज भी नहीं बन पाई है क्यों?

5 हमारे प्रदेश में कोरोना से लड़ने हेतु अस्पतालों में पर्याप्त बेड नहीं तैयार हो पाए क्यों?

6 लगभग 6 माह बीत गए किंतु हमारे अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन एवं आईसीयू बेड की व्यवस्था नहीं हो पाई। इस पर कब कदम उठाए जाएंगे?

सविस्तार—

लगभग 2 महीने के पूर्ण लॉकडाउन के पश्चात अब छत्तीसगढ़ के बड़े भाग में पुनः सरकार ने 8 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी है।

पिछले लॉकडाउन से हमें क्या फायदा हुआ?

शायद कुछ भी नहीं। क्योंकि अगर लाॅक डाउन से फायदा हुआ होता तो आज प्रतिदिन 4000 केसेस छत्तीसगढ़ में नहीं निकल रहे होते।

लॉकडाउन एक प्रकार से कोविड-19 संक्रमण रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया ऐसा समाधान है जिसमें बीमारी से ज्यादा इलाज नुकसानदायक है।

इस बार फल, सब्जियां, अनाज, पेट्रोल पंप, निर्माण कार्य, ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री आदि सब को बंद किया जा रहा है जिसका सीधा सीधा प्रभाव गरीब एवं अत्यधिक गरीब वर्ग पर पड़ेगा। बहुत सारा संसाधन जैसे सब्जियां, फल, अनाज इत्यादि सडने की आशंका है।

हमारे प्रदेश में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्योग मुख्यतः कृषि एवं निर्माण कार्य है। 8 दिन के लॉकडाउन के पश्चात इनको पुनः पटरी में आने के लिए कम से कम 15 दिन और लगेंगे।

लॉक डाउन का मुख्य उद्देश्य अपनी चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करना होता है।

लॉकडाउन को लागू करने में पुलिस एवं प्रशासन को अत्याधिक परिश्रम करना पड़ता है। इसके बजाय उसके आधे परिश्रम से हम अपने लोगों को अनुशासित कर सकते हैं।

आज जबकि हर मोहल्ले हर गली हर घर में कोरोनावायरस संक्रमण की दखलअंदाजी हो चुकी है। इसके लिए हमें जांच की सुविधा बढ़ाने तथा अस्पतालों में बढ़ रही वेटिंग लिस्ट को कम करने हेतु प्रयास करना चाहिए था।

लॉकडाउन के निर्णय से बेहतर इलाज में गतिरोध उत्पन्न होगा। उदाहरण के लिए यदि मरीज को माइल्ड लक्षण है तो वह चाह कर भी घर से बाहर नहीं निकल पाएगा तथा हो सकता है कि जब लॉकडाउन खुले तब तक एक बहुत बड़ा तबका सीरियस हालत में अस्पताल पहुंचे।

यह बहुत चिंता का विषय है की आम जनता को कोरोनावायरस की गंभीरता का अनुमान नहीं है जिसकी वजह से लोग उचित परहेज नहीं करते हैं। किंतु लॉकडाउन से जनमानस की मनोवृति नहीं बदली जा सकती।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी अपने रिसर्च टीम के माध्यम से सरकार से आग्रह करना चाहती है कि —
1 जिस प्रकार JEE, CLAT, CBSE की परीक्षा हेतु छूट दी गई है उसी प्रकार सब्जी विक्रय हेतु 1 दिन की आड़ में 4 घंटे की सुविधा दी जाए अन्यथा भीलवाड़ा मॉडल की तरह घर-घर अनाज एवं सब्जी की सप्लाई की जाए।

2 पेट्रोल पंप को दोपहर 12:00 से 4:00 तक खोला जाना चाहिए ।

3 हाईवे पर ट्रकों के आवागमन की छूट हो।

4 जो मरीज कोरोना लक्ष्मण से ग्रस्त हो उन्हें टेस्ट कराने हेतु आवागमन की छूट हो।

5 प्रशासन से हम आग्रह करते हैं कि इस समय का उपयोग बेहतर जांच सुविधा उपलब्ध कराने हेतु होना चाहिए। इसके अंतर्गत प्रत्येक वार्ड में रैपिड एंटीजन टेस्ट जांच हेतु एक स्थान निश्चित हो तथा नगर निगम इसकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से समस्त नागरिकों को दें।

6 इस समय का उपयोग अस्पतालों में और अधिक बेड की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु तथा दीर्घकालिक जरूरतें जैसे प्लाजमा थेरेपी, HFNO आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु होना चाहिए।
अंतः समस्त नागरिकों से अपील करते हैं कि सावधान रहें सुरक्षित रहें क्योंकि सावधानी ही सर्वोत्तम उपचार है।