किसानों को बताये गए मक्के फसल में फाल आर्मी वर्म कीट से बचाव के उपाय – इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय

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मक्का में फाल आर्मी वर्म कीट प्रकोप पर कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता विषय पर वेबीनार आयोजित

रायपुर, 11 सितम्बर, 2020। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर, अंबिकापुर, कोण्डागाँव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अखिल भारतीय मक्का अनुसंधान परियोजना, अंबिकापुर एवं साउथ एशिया बायोटेक्नालाॅजी सेन्टर, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में “मक्का में फाल आर्मी वर्म कीट प्रकोप पर कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम (आॅनलाइन वेबीनार) का आयोजन किया गया। आॅनलाइन वेबीनार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. सी.डी. माई, पूर्व अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड एवं अध्यक्ष, साउथ एशिया बायोटेक्नालाॅजी सेन्टर, नई दिल्ली थे एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने की। मुख्य अतिथि डाॅ. सी.डी. माई ने जैव नियंत्रण को बढ़ावा देने की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को इस विषय में जागरूक करने की महती आवश्यकता है। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्रों से आव्हान किया कि कोरोना काल में द्वारा टेलीफोन, मैसेज, सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों से सीधे सम्पर्क करें। आज के किसान जोखिम लेने से डरते नहीं हैं, वे सही प्रबंधन करना बखूबी जानते हैं उनमें आत्मविश्वास भी भरपूर है। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यो की सराहना की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फाल आर्मी वर्म के प्रकोप को प्रशिक्षण के माध्यम से कम करने एवं जागरूकता लाना था। इस आॅनलाइन वेबीनार में लगभग 100 प्रतिभागी शामिल हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मक्के का काफी बड़ा क्षेत्र है और मक्के के नवीन किस्में आने से इसमें निरन्तर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि एक बार में ही बीज का अंकुरण करने और एक ही उम्र के पौधे होने पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप कम होता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, के निदेशालय विस्तार सेवाये डाॅ. एस.सी. मुखर्जी कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। अपने स्वागत उद्बोधन में उनके द्वारा कृषकों को इस कीट को नियंत्रण हेतु जागरूक होने कहा गया, साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा इस कीट को नष्ट करने हेतु उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। डाॅ. भागीरथ चैधरी, निदेशक, साउथ एशिया बायोटेक्नालाॅजी सेन्टर ने अपने वक्तव्य में कहा कि छत्तीसगढ़ में फाल आर्मी कीट पर सबसे प्रभावशाली कार्य हो रहा है। अतः किसानों को जागरूक करना नितान्त आवश्यक है। उन्होंने फेरोमोन ट्रैप लगाने, बीजोपचार करने की आवश्यकता बताई। डाॅ. साई दास, पूर्व निदेशक, भा.कृ.अनु.प., मक्का अनुसंधान निदेशालय, नई दिल्ली एवं सलाहकार, साउथ एशिया बायोटेक्नालाॅजी सेन्टर, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में मक्के को लाभकारी फसल बताया। नई किस्मों के लगाने से मक्का उत्पादन का क्षेत्रफल पूर्व की तुलना में समृद्ध हुआ है। उन्होंने खरपतवार के नियंत्रण को आवश्यक बताया। छत्तीसगढ़ में भविष्य में मक्के की बेहतरीन सम्भावनायें हैं और यह फसल आर्थिक रूप से लाभकारी भी है। डाॅ. आर.के. बाजपेयी, संचालक अनुसंधान, इं.गां.कृ.वि., रायपुर ने छत्तीसगढ़ में मक्के की वर्तमान स्थिति एवं फाल आर्मी वर्म के नियंत्रण के बारे में जानकारी दी। इस दौरान अपर संचालक कृषि, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, छ.ग. शासन, रायपुर श्री एम.एस. केरकेट्टा अपर बताया गया कि विगत वर्ष आर्मी वर्म का अत्यधिक प्रकोप था। अतः इस बारे में किसानों को जागरूक किया गया। फलस्वरूप इस वर्ष इस कीट का प्रकोप कम दिखाई दिया। इस आॅनलाइन वेबिनार का प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. जयलक्ष्मी गांगुली, एफ.एम.सी डाॅ. प्रदीप वर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में निदेशालय विस्तार के सभी वैज्ञानिकगण, कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषक बन्धुओं ने भी भाग लिया। निदेशालय विस्तार के वैज्ञानिक डाॅ. अरूण त्रिपाठी द्वारा कार्यक्रम का संचालन एवं अन्त में सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया।