सावधान! साइबर क्राइम में अब मोबाइल से मैसेज लिंक भेजकर और ओटीपी पूछकर हो रही बड़ी ठगी

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मनेंद्रगढ़(सुददु लाल वर्मा)- बिना घर में घुसे रुपए उड़ानें के साइबर क्राइम के नए फार्मूले में पढ़े-लिखे अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही कार्पोरेट सेक्टर के लोग भी शातिरों के शिकार हो रहे हैं। दरअसल साइबर क्राइम में अब मोबाइल से मैसेज बॉक्स में मैसेज लिंक भेजकर, मोबाइल नंबर और ओटीपी पूछकर बड़ी ठगी हो रही है। कोरिया में एक साल के भीतर ऐसी कई ठगी हो चुकी है, जिसके बाद भी लोगों में जागरूकता नहीं आ रही है। इस मामले में पीडि़तों के पैसे वापस लेने के लिए उन्हें भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। इधर कोरिया पुलिस ने इस मामले को लेकर अब ई-रक्षा अभियान की शुरूआत कर दी है, जिसमें लोगों को साइबर क्राइम से बचने के लिए अपील की जा रही है।

कोरिया एसएसपी डॉ पंकज शुक्ला ने बताया कि ऑनलाइन और साइबर ठगी पर आम लोगों को जागरूक करने के लिए ई-रक्षा अभियान चलाया जा रहा है। आम लोगों से अपील है कि कोई भी फेक कॉल, मैसेज और लिंक में अपनी निजी और बैंक खातों की जानकारी ना दें। साइबर क्राइम से बचने के लिए रक्षाबंधन पर एक रक्षा सूत्र ओटीपी के लिए रखें और अपनी ओटीपी की सुरक्षा का संकल्प लें।

एएसपी डॉ. पंकज शुक्ला ने बताया कि मोबाइल के मैसेज बॉक्स में आए अनचाहे लि॑क्स को खोलकर इसमें अपनी निजी जानकारी शेयर ना करें। साइबर ठगी के नए ट्रेंड अब मोबाइल भी हैक किया जा रहा है, वहीं ओटीपी के माध्यम से भी ठगी की जा रही है। ओटीपी प्राइवेट व गोपनीय है उसे किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए।

कोरिया एएसपी डॉ.पंकज शुक्ला ने साइबर क्राइम से बचने बताए ये उपाय- ओटीपी चाहे बैंक का हो या किसी और सर्विस का। इसे किसी के भी साथ शेयर करना खतरनाक हो सकता है। किसी को बताने पर एप्लीकेशन का फाइनल ऐक्सेस साइबर अपराधी को मिल जाता है जिसके बाद वह आपको भी आप ही के एप यूज़ करने से रेस्ट्रिक्ट कर सकता है। हर ओटीपी के साथ यह भी लिखा हुआ आता है कि वह किसके द्वारा और किस लिए भेजा गया है, अत: ओटीपी के साथ आए मेसेज को ध्यान से पढ़ें और इस्तेमाल के बाद उसे तुरंत डिलीट भी करें। सबसे ज्यादा साइबर अपराध ओटीपी के द्वारा ही किए जारहे हैं। मोबाइल को लिंक भेज कर हैक करना अब एक बेहद आसान तरीका बन चुका है। इसके जरिये अलग अलग तरीके से आपकी लोकेशन, आईपी इन्फॉर्मेशन, बेसिक जानकारी अथवा पूरे मोबाइल का एक्सेस लिया जा सकता है। आम तौर पर लिंक पर क्लिक करने से आपके फोन पर एपीके फाइल इनस्टॉल एवं रन होती है जिसके बाद आपके फोन में मौजूद सारे डेटा एवम गतिविधियों पर हैकर अपनी नजऱ जमाए बैठे होते हैं। इनमे आपके कॉल लॉग ,कॉल रिकॉर्डिंग, एसएमएस, फ़ोटो, वीडियो, चैट्स, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, हाईक, हैंगआउट, ईमेल, पेटीएम ,जैसे सभी तरह के ऐप्स का डेटा ,पासवर्ड जैसी तमाम चीजों को हैकर्स एक्सेस कर सकते हैं।

इसके अलावा वे आपके ऑडियो एवम वीडियो कॉल ,लाइव चैटिंग के स्क्रीनशॉट ,आस पास चल रही बातचीत आदि भी सुनने एवम रेकॉर्ड करने में सक्षम हो जाते हैं । इससे बचने के लिए सबसे पहले अपने फोन पर पेड एंटीवायरस इनस्टॉल करें, इसके साथ ही अपने प्लेस्टोर की – प्लेप्रोटेक्ट सेटिंग्स भी ऐक्टिव रखें। किसी भी अनजानलिंक पर क्लिक करने से बचें। ऑनलाइन ठगी की रोकथाम के लिए हर व्यक्ति सतर्क रहे। किसी भी व्यक्ति को आधार कार्ड, एटीएम कार्ड और ओटीपी नम्बर नहीं बताए। मोबाइल पर ऐसे किसी लिंक को क्लिक कर एप डाउनलोड नहीं करें। यदि लिंक क्लिक हो जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें।