शताब्दी में पहली बार चतुर्योग में मनाया गया रक्षाबंधन का त्यौहार, 29 साल बाद आया ऐसा शुभ संयोग..

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मनेंद्रगढ़ (सुददु लाल वर्मा)– शताब्दी में पहली बार चतुरयोग में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। रक्षाबंधन पर आज सोमवार और पूर्णिमा का योग भगवान महादेव की विशेष कृपा दिलाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर शताब्दी में पहली बार चतुर्योग में रक्षाबंधन आया है। सर्वार्थ-सिद्धि योग आयुष्मान योग के चलते दीर्घायु का वर प्रदान करेगा। इस बार भद्रा और राहुकाल सुबह 9.30 से पहले ही समाप्त हो रहे हैं। इस योग में भाई-बहन की सभी इच्छाएं पूरी होगी।

राखी बंधन का मुहूर्त शुभ योग सुबह 9:31 से 10:46 तक, अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 से 12:53 तक, अपराहन मुहूर्त : दोपहर 1:48 से शाम 4:29 तक, लाभ मुहूर्त : दोपहर 3:48 से शाम 5:29 तक, संध्या अमृत मुहूर्त : शाम 5:29 से 7:10 तक रहा।

रक्षाबंधन पर पूर्णिमा के साथ-साथ सावन का आखिरी सोमवार रहा इसके अलावा पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहा। इससे रक्षाबंधन के दिन की शुभता रही। सोमवार की सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहा। सभी बहनें सुबह 9:28 पर भद्रा समाप्त होने के बाद ही अपने भाइयों को राखी बांधी। भद्रा की समाप्ति के साथ साथ ही सोमवार का राहुकाल भी निकल चुका था। पुरोहितों के अनुसार शताब्दी में पहली बार चतुर्योग में रक्षाबंधन आया है इसमें आयुष्मान योग को सर्वार्थ सिद्धि योग बुधादित्य योग व शनि चंद्र के मिलन से विश्व योग यानी चतुर्योग बन रहे हैं।

पुराणों में ऐसी कथा है कि एक समय जब इंद्र युद्ध में दानवों से पराजित होने लगे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी ने एक रक्षा सूत्र इंद्र की कलाई पर बांधा था जिससे इंद्र को विजय प्राप्त हुई थी। देवासुर संग्राम में देवी भगवती ने देवताओं के मौली बांधी थी। तभी से रक्षा सूत्र बंधने की यह परंपरा चली आ रही है। बहने राखी बांधने से पहले राखी की थाली सजाई और थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखी। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधी। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारी, फिर भाई को मिठाई खिलाई। राखी बांधने के बाद भाइयों ने इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट दिया और जीवन पर्यन्त तक बहनों की रक्षा करने का वचन दिया।

पुरोहितों के मुताबिक सावन की पांचवीं सोमवारी पर श्रावणी पूर्णिमा , बुधादित्य योग,विषयोग व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग है। पूर्णिमा के देवता चंद्रदेव हैं और सोमवार के भगवान शिव हैं। भगवान शिव के माथे पर चंद्रमा विराजमान हैं। वहीं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में ही देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी। यह संयोग शुभ फलदायी है। इससे इस सोमवारी को जिन श्रद्धालु की कुंडली में विष योग, ग्रहण योग और केमद्रुम योग है उन्हें भगवान शिव की आराधना करने से इन ग्रहों से मुक्ति मिलेगी।

विधायक गुलाब कमरों में रक्षाबंधन पर लिया क्षेत्र के विकास का संकल्प- भरतपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरों रक्षाबंधन पर सोमवार को अपने ग्रह ग्राम साल्ही पहुंचे और अपनी बहन जिला पंचायत सदस्य उषा सिंह से राखी बंधवाई और अपनी बहन के रक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के समुचित विकास का संकल्प लिया। वही बहन उषा सिंह जिला पंचायत सदस्य ने अपने विधायक भाई गुलाब कमरों की कलाई में राखी बांधकर अपनी शुभकामनाएं दी। मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार धूम धाम और हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। हलांकि इस बार रक्षाबंधन के त्यौहार में कोरोना महामारी की काली छाया रही जिसके कारण बहुत सी बहनें अपने भाइयों के पास राखी बांधने रक्षाबंधन पर नहीं पहुंच सकीं।