विधायक चिंतामणि के संसदीय सचिव बनने के बाद स्वागत में शासकीय कर्मचारी हुए नतमस्तक, उड़ी सोशल डिस्टेंस की धज्जियां, लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी और उक्त विभाग के अधिकारी – कर्मचारी ही नही पहुँचे

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अम्बिकेश गुप्ता / कुसमी। सामरी विधानसभा विधायक चिंतामणि महाराज का नए दायित्व संसदीय सचिव पद ग्रहण करने के बाद आज शनिवार को कुसमी नगर में प्रथम आगमन हुआ. कुसमी नगर आगमन पर कुसमी के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह आतिशबाजी कर सम्मान दिया. इस बीच कोविड-19 के मद्देनजर सोशल डिस्टेंस की जमकर धज्जियां उड़ती नजर आई. कई शासकीय कर्मचारी नतमस्तक होते भी नजर आये. राजनीतिक कार्यक्रम में सार्वजनिक स्थान पर शासकीय कर्मचारियों द्वारा विधायक का पैर छूना चर्चा का विषय बन गया है ?

ब्लॉक कांग्रेस कुसमी ने सर्वप्रथम चिंतामणि महाराज का स्वागत ग्राम पंचायत कसमार से किया. यहाँ पर अतिशबाजी कर पुष्प माला पहनाकर नये दायित्यों का निर्वहन हेतु बधाई दिया. जिसके बाद सभी कुसमी के विश्राम गृह पहुँचे. यहाँ भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुष्प माला पहनाकर व अतिशबाजी कर स्वागत किया. यहां से विधायक का काफिला हृदय स्थल काका लरंगसाय चौक पहुचा यहां पर स्थापित शिव मंदिर मे पूजा अर्चना करने के बाद सभी कन्या हाई स्कूल प्रांगण में पहुचे. यहां पर कतार बद्ध प्रतीक्षा में खड़े सभी समाज के अध्यक्ष एवं शासकीय अधिकारी – कर्मचारीयो ने फुल मला से स्वागत किया।

स्वागत कार्यक्रम के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुवे ब्लॉक् कांग्रेस कमेंटी अध्यक्ष व जनपद पंचयात उपाध्यक्ष हरीश मिश्रा ने विधायक को संसदीय सचिव बनने पर बधाई देकर लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी पर कहा कुसमी – अंबिकापुर मार्ग सहित अन्य मार्ग इस क्षेत्र का बेहतर करना अति आवश्यक है जिसे अच्छा बनवाने पहल जरूरी हैं. बहुत से ग्राम पंचायत जहा मुलभुत आवस्यकता से काफ़ी बंचित है. उनका चयन कर समस्या का निदान करने के साथ ही धार्मिक भवन का भी बहुत जगह बहुत से समाज मे आवस्यकता है उसे भी बारी – बारी से संसदीय सचिव की नैतिकता के आधार पर पूरा करने की कोसिस करें।

सामरी विधायक एवं संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने कुसमी एवं सामरी विधान सभा के समस्त अनिवार्य कार्यों मुलभुत सुविधा को दुरस्त करने की बात कहते हुवे इस क्षेत्र मे संसदीय सचिव बनने पर मुख्यमंत्री एवं सरगुजा महाराज व मंत्री टीएस सिंह को धन्यवाद दिया. साथ ही उन्होंने आगे कहा जितना भी बन पायेगा विधान सभा क्षेत्र मे बिकास कार्य करूंगा। बहुत से ऐसे दुरस्त जगह है जहा लोग मुलभुत आवस्यकता से कोसो दूर है बिभाग के कर्मचारी जाकर देखे मुझे समस्या से अवगत कराये मेरा पूरा पूरा मदद बिकाश कार्यों को पूरा करने के लिए हमेसा रहेगा. सभी अधिकारी निर्भीक होकर कार्य करें. जिस अधिकारी को कार्य नहीं करना हैं वे बाहर जाने के लिए तैयार रहें।


आयोजित सभा का मंच संचालन डॉ अभिषेक पाण्डेय ने किया. एवं तहसीलदार इरसाद अहमद ने बीते समय मे किये गए विधायक चिंतामणि महाराज के पुराने कार्यों को याद कर आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कुसमी एसडीएम दीपक निकुंज, जनपद पंचायत मुख्य कार्य पालन अधिकारी बिनोद जायसवाल ,तहसीलदार मो. इरसाद अहमद, वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी बहादुर राम जनपद अध्यक्ष हुमंत सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष गोवर्धन राम, नपं नेता प्रतिपक्ष सोमनाथ भगत, एल्डरमेन सुशील दुबे, राशिद आलम, पार्षद बालेश्वर, पंकज दुबे सहित अधिकारी-कर्मचारी एवं कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्त्ता मौजूद थे।

लोक निर्माण विभाग के संसदीय सचिव का पहला आगमन पर ही उक्त विभाग अधिकारी – कर्मचारी नहीं पहुचे. विधायक ने ली पीरियड तो हड़बड़ाए पहुचे ईई, एसडीओ व सब इंजीनियर

आज के स्वागत सम्मान कार्यक्रम में विधायक चिंतामणि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से किसी विषय पर चर्चा करना चाहा किन्तु तब – तक लोक निर्माण विभाग से कोई भी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित नही मिला. जिसके बाद नाराज चिंतामणि महराज ने अनुपस्थित अधिकारीयों को कुसमी एसडीएम को नोटिस जारी करने कहा. इसके कुछ ही देर बाद विधायक चिंतामणि की नाराजगी की खबर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मिल गई और कुछ ही देर बाद ईई, एसडीओ व सब इंजीनियर हड़बड़ा कर आयोजित कार्यक्रम में पहुच गये. जिन्हें विधायक ने कार्यप्रणाली पर सुधार लाने की समझाइश दी.

शासकीय कर्मचारियों का नतमस्तक होना सार्वजनिक रूप से गैर संवैधानिक रवैया कहा तक सही

विधायक चिंतामणि महराज स्व. संत गहिरा गुरु महराज के मंझले पुत्र हैं संत गहिरा गुरु महाराज को इलाके के लोग भगवान की तरह माना करते थे. अविभाजित सरगुजा सहित अन्य स्थानों में संत समाज के कई अनुवाई है. जिनके अनुवाई आज भी भगवान के रूप में उन्हें याद करते हैं. इलाके में संत गहिरा गुरुजी के पुत्र होने के नाते भी विधायक चिंतामणि महराज व अन्य पुत्रो को उनके अनुवाई भगवान स्वरूप मानते हैं यही कारण हैं कि सभी नतमस्तक रहते हैं कई अनुवाई शासकीय अधिकारी व कर्मचारी हैं। राजनीतिक कार्यक्रम में कोविड़ -19 के मद्देनजर सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाकर सार्वजनिक तरीके से शासकीय कर्मचारियों को गैर संवैधानिक रूप से पैर छू कर नतमस्तक होना कहा तक जायज हैं. यह सवाल बुद्धिजीवियों के बीच चर्चा का विषय बन गया हैं ?