डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर धरना-प्रदर्शन कांग्रेस का एक और फ्लॉप शो : भाजपा

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कांग्रेस नेता प्रदेश सरकार पर राज्य में डीज़ल-पेट्रोल पर वैट कम करने के लिए दबाव बनाएँ : श्रीचंद

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन को कांग्रेस का एक और फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि आज डीज़ल-पेट्रोल की कीमतों को लेकर स्यापा मचा रहे कांग्रेस के नेता देश को गुमराह करने के लिए अपने झूठ का रायता चाहे जितना फैलाने की कोशिश कर लें, देश अब कांग्रेस के झाँसों में क़तई नहीं आएगा।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक श्री सुंदरानी ने कहा कि कांग्रेस डीज़ल-पेट्रोल में मूल्यवृद्धि पर तथ्यों से तो मुँह चुरा ही रही है, अपने संप्रग शासनकाल की महंगाई से लोगों का ध्यान भी भटका रही है। श्री सुंदरानी ने कहा कि आज पेट्रोल भारत में 78.91 रु. और डीज़ल 77.94 रु. प्रति लीटर बिक रहा है जबकि कांग्रेसनीत संप्रग के शासनकाल में जनवरी 2013 में पेट्रोल 83 रु. प्रति लीटर तक बिक रहा था। इसी प्रकार रसोई गैस की कीमतों को लेकर कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि संप्रग शासनकाल (जनवरी 2014) में रसोई गैस की कीमत 1241 रुपए तक जा पहुँची थी जो आज की तारीख़ में लगभग 660-676 रुपए है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक श्री सुंदरानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 50 रुपए की शराब 170 रुपए में बिकवाने वाली सरकार की चाटुकारिता में जुटे कांग्रेस नेता डीज़ल-पेट्रोल की कीमतों को लेकर प्रदेश सरकार पर इस बात के लिए दबाव क्यों नहीं बनाते कि वह राज्य में डीज़ल-पेट्रोल पर वैट कम करे ताकि लोगों को सुलभ दर पर डीज़ल-पेट्रोल मिले। पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में वैट कम कर दी गयी थी लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस ने भाजपा सरकार के निर्णय को रद्द कर दिया। श्री सुंदरानी ने कहा कि आज प्रदेश में शराब का करोड़ों रुपए का अवैध व्यापार चल रहा है और सरकार की शह पर 30 प्रतिशत शराब अवैध कारोबार में खप रही है। डीज़ल-पेट्रोल की कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस नेता यह अच्छी तरह समझ लें कि डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से मिलने वाला राजस्व तो देश के ख़जाना में ही जा रहा है, अब प्रदेश सरकार यह स्ष्ट करे कि 30 फीसदी शराब के अवैध कारोबार से मिलने वाला राजस्व प्रदेश के ख़जाने में नहीं जाकर कहाँ जा रहा है?