मृत बच्चे के पिता ने कलेक्टर के जनदर्शन में जिम्मेदारों पर अपराध दर्ज करने और मुआवजा की मांग की


गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू और वार्ड में हुई नवजातों की मौत के मामले में जहां एक ओर जांच प्रक्रिया चल रही है, वहीं मृत बच्चे का कफन-दफन करने के बाद स्वजनों की ओर से लापरवाही का स्वर मुखर होने लगा है। बच्चों की असमय मौत के बाद उठी आवाज थमी नहीं है। विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से मंगलवार को पुन: आवाज उठाई गई। सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन में भी एक मृत नवजात के अभिभावक ने आवेदन प्रेषित कर सवाल उठाया है कि बच्चे का वजन दो दिन में सौ ग्राम बढऩे के बाद कैसे हो गई मौत…?


बलरामपुर जिले के राजपुर ब्लाक अंतर्गत ग्राम धंधापुर निवासी राज मलिक पिता बुद्धू राम 33 वर्ष ने एसएनसीयू में बिजली गोल होने के बाद वार्मर बंद होने की वजह से नवजात की मौत का आरोप लगाते हुए कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया है। ग्रामीण ने मेडिकल कॉलेज के डीन, राजमाता श्रीमति देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के अधीक्षक, शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष के विरूद्ध हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। राज मलिक ने प्रेषित किए गए आवेदन में बताया है कि उसकी पत्नी नेहा का प्रसव दो दिसंबर को 11.47 बजे घर में हुआ, इसके उपरांत उसे रेवतपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए, यहां से डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के लिए रिफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू में दो दिसंबर को शाम 8-9 बजे के बीच नवजात शिशु को भर्ती किया गया, तब बच्चे का वजन दो किलो था, बच्चा सिर्फ दूध नहीं पी रहा था। इसके बाद नर्सों का कहना था कि बच्चा स्वस्थ्य हो रहा है और वह दूध पीना शुरू कर दिया था। बच्चे का वजन भी दो दिनों के अंदर 100 ग्राम बढ़ गया था। चार दिसंबर की रात के लगभग 11 बजे बार-बार बिजली गुल होने लगी, उसके एक घंटे उपरांत बिजली घंटे भर के लिए गोल हो गई। इस दौरान नर्सों ने कुछ माताओं को अंदर गर्म कपड़े लेकर आने के लिए कहा और उन्हें वार्मर बंद होने की वजह से गर्मी देने के लिए ढंकने कहा गया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें वार्मर बंद होने की जानकारी नहीं दी गई और न ही गर्म कपड़े से बच्चे को ढंकने कहा गया। अलसुबह लगभग 4 बजे बच्चों के मौत की खबर मिलने लगी। उन्हें नौ बजे के बाद फोन करके बताया गया कि बच्चे की मौत हो गई है। राज मलिक का कहना है कि लापरवाही की वजह से वार्मर बंद होने के बाद भी बच्चे को गर्मी देने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया, इससे बच्चे को ठंड लगी और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अपनी गलती छिपाने के लिए बच्चे की स्थिति गंभीर होना बता रहा है, उसने जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने और सरकार की ओर से मुआवजा राशि प्रदान कराने की मांग की है।


मृतकों के स्वजनों को चिन्हांकित कर दें 50-50 लाख रुपये मुआवजा

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू में नवजातों की मौत के जिम्मेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर समाज सेवियों ने मंगलवार को नगर के हृदयस्थल, स्वामी विवेकानंद चौक में धरना-प्रदर्शन करके छग के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष मानव अधिकार आयोग के नाम कलेक्टर सरगुजा के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इन्होंने कहा है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार नवजात शिशुओं की मौत सामान्य घटना नहीं है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से लगातार मौतें हो रही है। इसकी शिकायत कई बार हुई है, लेकिन हालात में सुधार नहीं हो पाया है। एक वर्ष पूर्व भी कई बच्चों मौत हो गई थी, इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था और कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा था, लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। इसका खामियाजा बच्चों और आम नागरिकों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है। मांग की गई है कि मृत बच्चों सहित अन्य के स्वजनों को चिन्हांकित कर प्रत्येक परिवार 50-50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि दी जाए और लापरवाह डॉक्टरों, नर्सों, कर्मचारियों पर जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। धरना-प्रदर्शन में अंकुर सिन्हा, अजीज टोप्पो, ज्योति चौरसिया, सुनीता सोनहा, अनीता पैकरा, सर्वेश्वरी बागे, अनिता टेकाम, दीपा लकड़ा, पूजा, सुरेश बुनकर, रूदन बड़ा, राम सिन्हा, विकास साहू शामिल थे।


मरीज के स्वजनों से करते हैं दुव्र्यवहार
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजनों के साथ स्टाफ नर्सों व चिकित्सकों के द्वारा कई बार दुव्र्यवहार करने की शिकायत सामने आई है। इसके बाद भी हालात में सुधार के बजाय हर मामले में लीपापोती का खेल चल रहा है। डॉक्टर आम नागरिकों से इलाज के नाम पर, ऑपरेशन के नाम पर पैसों का मांग करते हंै, रुपये नहीं देने पर धमकाने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल मौत का अड्डा बन चुका है। इस पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।


जिम्मेदारी सौंपे दूसरे विधायक को
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ नर्सों की भर्ती तत्काल करने की मांग की है। कहा गया है कि सरगुजा संभाग को मेडिकल कॉलेज तो मिल गया किंतु आम लोगों को स्टाफ की कमी के कारण सही इलाज व सुविधा नहीं मिल पा रही है, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार है। मांग की गई है कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी किसी दूसरे विधायक को सौंपी जाए और लापरवाह डॉक्टरों, अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।


मोबाइल में व्यस्त रहते हैं जिम्मेदार
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल के अंदर कई बार चिकित्सक व स्टाफ को मोबाइल में व्यस्त मिलते हैं। पीडि़त खड़े रह जाते हैं लेकिन उनकी सुनने के बजाए मोबाइल में इनका ध्यान रहता है। ऐसे में कर्तव्य पालन के समय मोबाइल से इनकी दूरी बनाने की पहल होनी चाहिए। क्योंकि अक्सर मोबाइल की घंटी बजने के बाद ये अपनी जिम्मेदारी को भूल जाते हैं और अपना काम रोक कर मोबाइल पर बात करने लगते हैं।


बदतर हालात में हो सुधार, जिम्मेदारों पर करें सख्त कार्रवाई  

आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा के नेतृत्व संघ के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लचर व्यवस्था के कारण चार नवजात शिशुओं की मृत्यु का आरोप लगा सख्त कार्रवाई की मांग की है। कहा गया है कि इस अस्पताल का हालात बेहद बदतर है। इस घटना के बाद आम जनों में एक अलग ही डर का माहौल बन गया है। नवजात शिशुओं की मृत्यु के पीछे जिन भी अधिकारियों की लापरवाही है उन पर सख्त कार्रवाई की मांग गैर राजनीतिक दल आजाद सेवा संघ ने की है और समय रहते यहां की व्यवस्था को दुरुस्त करने का आग्रह किया है ताकि आने वाले समय में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए। ज्ञापन सौंपते समय छात्र मोर्चा के जिला अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता, अभिनव चतुर्वेदी, शुभम पटेल, रवि गुप्ता, सुभाष ठाकुर, पंकज ठाकुर, देवेंद्र ठाकुर, करन राजवाड़े, नितिश पटेल, अतुल गुप्ता उपस्थित रहे।


जनरेटर के नाम पर प्रतिमाह हजारों लीटर ईंधन की खपत

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज सरगुजा ने भी नवजातों की मौत के मामले में अधीक्षक के अलावा चिकित्सक, मेट्रन, मैनेजमेंट प्रभारी सहित अन्य पर अपराध दर्ज करने की मांग करते हुए कलेक्टर के जनदर्शन में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। समाज के जिला अध्यक्ष डॉ.अमृत सिंह मराबी, अनुक प्रताप सिंह टेकाम सहित अन्य ने सौंपे गए आवेदन में कहा है कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर, नर्स, कर्मचारियों एवं प्रबंधन की घोर लापरवाही की वजह से चार घंटे बिजली नहीं रही और चार नवजात शिशुओं की मौत हो गई। अस्पताल में आठ जनरेटर हैं, जिसमें से मात्र तीन चालू हंै। इसके ईंधन के नाम पर हजारों लीटर की खपत प्रति माह दिखाई जाती है। ऐसी घटना पूर्व में भी प्रबंधन की लापरवाही से हो चुकी है। मांग की गई है कि 04 दिसंबर की रात ड्यूटी पर तैनात लोगों के विरूद्ध हत्या का मामला दर्ज किया जाए

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