गिरजा ठाकुर रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव के पत्र और इस्तीफे का विषय शून्यकाल शुरु होते ही सदन में विपक्ष ने गुंजायमान किया। इस मसले पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने इस पर व्यवस्था की मांग रखी जिसे अध्यक्ष चरणदास महंत ने खारिज कर दिया, लेकिन विपक्ष अड़ा रहा। हंगामा होते देख विधानसभा की कार्यवाही पहले करीब दस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई, बाद में दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इधर प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ विपक्ष गुरुवार को अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगा। विधानसभा सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी गई है। बीजेपी और जेसीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव की सूचना पर दस्तखत किए हैं। भारतीय जनता पार्टी अविश्वास प्रस्ताव के मद्देनजर प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर, खाद बीज संकट, संवैधानिक संकट के हालात जैसे करीब डेढ़ सौ बिंदुओं का आरोप पत्र तैयार कर रही है। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विधानसभा सचिवालय को दिए गए पत्र में बीजेपी और जेसीसी के 15 सदस्यों ने दस्तखत किए हैं।बृजमोहन, अजय, शिवरतन के तीखे तेवर  वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा-मंत्री मुख्यमंत्री को पत्र लिखते रहते हैं, लेकिन जनहित के मुद्दों पर आरोप लगाकर साजिश का आरोप लगाते हुए पद छोडं़े तो मसला गंभीर है। अजय चंद्राकर ने कहा-यह व्यवस्था का प्रश्न है, सदन के नेता यहां मौजूद है, मंत्री यहां नहीं हैं। सदन के नेता मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि मंत्री के आरोप सही हैं या गलत। गलत हैं तो मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने का एलान करें, यदि नहीं तो आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करें। शिवरतन शर्मा ने भी इस मौके पर तीखे तेवर दिखाए।सत्ता पक्ष ने कहा यह विपक्ष का षड्यंत्र हैविपक्ष ने मांग रखी कि यह व्यवस्था का प्रश्न है, व्यवस्था आनी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने कहा-किसी मंत्री का पत्र लिखना संवैधानिक संकट नहीं है, यह व्यवस्था के प्रश्न के अंतर्गत नहीं आता। विपक्ष के हमले के बीच सत्ता पक्ष की ओर से अमरजीत भगत और शिव डहरिया ने मोर्चा सम्हाला और कहा-पत्र सही है या गलत है, यह आप कैसे तय कर रहे हो, यह विपक्ष का षड्यंत्र है, पत्र आया कैसे आप लोगों के पास।सत्ता पक्ष की टिप्पणी से भड़का विपक्षसत्ता पक्ष की ओर से आई टिप्पणी पर विपक्ष भड़क गया और फिर बृजमोहन ने कहा-क्या छत्तीसगढ़ की सरकार बगैर संविधान, बगैर नियम के चलेगी? बृजमोहन ने मंत्री के शपथ के शब्दों को दोहराते हुए कहा यदि यह गोपनीय पत्र था तो मुख्यमंत्री के यहां से सार्वजनिक हुआ या मंत्री के यहां से? यह शपथ का उल्लंघन है…जब तक आवश्यक ना हो सार्वजनिक नहीं करुंगा, पर सार्वजनिक हुआ…तो एक मिनट भी इस सरकार को रहने का अधिकार नहीं है।हसदेव और सिंहदेव का अस्तित्व खतरे मेंशून्यकाल में छजका के वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा-छत्तीसगढ़ में हसदेव और सिंहदेव का अस्तित्व खतरे में है।इस बहस के बीच नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा-सबको सब पता है, यहां से दिल्ली तक सबको पता है, बस मुख्यमंत्री कहते हैं मुझे पता नहीं है, तो क्या इस सरकार को गूंगी-बहरी सरकार कहें। विपक्ष इस मसले पर व्यवस्था के प्रश्न पर अड़ा रहा, प्रधानमंत्री आवास के लिए पैसा नहीं दिए जाने पर भी विपक्ष जवाब मांगता रहा, फिर मसला इस कदर हंगामे में तब्दील हुआ कि सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही दस मिनट के बाद जब शुरू हुई तो विपक्ष फिर इसी मसले पर व्यवस्था और सीएम बघेल से जवाब मांगने लगा, इसके बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई।बृजमोहन ने पढ़ा सीएम के लिखे पत्र कोभाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने टीएस सिंहदेव द्वारा सीएम को लिखे गए पत्र को सदन में पढ़ा और कहा कि एक मंत्री द्वारा सरकार पर आरोप लगाते हुए पत्र लिखा गया है, इसे लेकर उन्होंने व्यवस्था की मांग की। सत्तापक्ष की टिप्पणी के बाद वहां हंगामा होने लगा। विपक्ष की इस बात को विधानसभा अध्यक्ष ने नहीं माना और भारी हंगामे को देखते हुए सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। सदन में सरकार पर घोषणा पत्र में जनता से किए गए 36 वादे पूरे नहीं करने के आरोप पर सीएम भूपेश बघेल ने स्वीकारा कि 19 वादे पूरे नहीं हुए। इनमें 15 वादों पर कोई काम नहीं हुआ, जबकि 4 वादों पर आंशिक रूप से काम किए गए। घोषणा पत्र के अनुसार शराबबंदी, बेरोजगारी भत्ता व शहरी क्षेत्र में दो कमरों का मकान, शहरी इलाके में संपत्ति कर 50 प्रतिशत माफ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह समाप्त करने का काम भी नहीं हो पाया है।19 वादे जो नहीं हुए पूरेशराब बंदी, बेरोजगारी भत्ता, शहरी क्षेत्र में आवासहीनों को दो कमरे का मकान, होमस्टेड अधिनियम, अनियमित संविदा और दैनिक वेतनभोगी को नियमितिकरण करना और किसी की छंटनी ना करना, सर्व वृद्धा पेंशन और वरिष्ठ नागरिक (75 वर्ष से उपर) तथा सर्व विधवा पेंशन को 1000 रुपये देना, जल संसाधन नीति, सिंचाई शुल्क की माफी, हर ब्लॉक में फूड पार्क, लोकपाल अधिनियम, पत्रकारों वकीलों और डॉक्टरों के संरक्षण के लिए विशेष कानून, गांव, पारा और टोला जो अन्य किसी मौजूदा योजना में शामिल नहीं किए गए उन्हें ग्राम सड़क योजना से जोडना, वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर, वैज्ञानिक आयोग, पर्यटन मास्टर प्लान और पर्यटन को उद्योग स्वरूप बनाना, राज्य सरकार की नौकरी में आउट सोर्सिंग की पूरी तरह समाप्ति, सरकारी स्कूलों में 9 वीं कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं को मुफ्त साइकिल देना, कॉलेज और स्कूली छात्र-छात्राओं को मुफ्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा, संपत्ति कर को शहरी इलाके में 50 प्रतिशत तक कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्णत: समाप्त करना।धान के बकाया बोनस का भी भुगतान नहीं-राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि घोषणा पत्र में उल्लेखित सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा, किसानों के दो वर्ष के धान का बकाया बोनस भुगतान किया जाएगा। यह वायदा भी शत-प्रतिशत पूरा नहीं हुआ है। राज्य सरकार ने बताया कि दस दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ तो पूरा हुआ लेकिन किसानों को दो वर्ष के धान का बकाया बोनस भुगतान नहीं हो पाया है।

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