आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने आज रात से रायपुर में लगने वाले संपूर्ण लॉकडाउन में मानसिक रूप से विकृत लोगों और आवारा जानवरों के संरक्षण और उनके भोजन की व्यवस्था की फ़िक्र करते हुए कहा है कि कम से कम मानवता के लिए ही सही, रायपुर नगर निगम प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। चूंकि इस बार का लॉकडाउन पिछले सभी लॉकडाउन के मुकाबले ज्यादा कठोर होने की संभावना है इसलिए जब होटल – रेस्तरां, खाने-पीने व चाय – पानी के ठेले व छोटी मोटी दुकानें, किराना दुकान और फल – सब्जियों के बाजार भी प्रतिबंधित कर दिए गए हैं तब उस सूरत में मानसिक रूप से विकृत लोगों और आवारा जानवरों के खाने-पीने की परेशानी अवश्य होगी।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि पहले के जितने भी लॉकडाउन लगे थे उनमें “द ह्यूमन सोसाइटी” जैसे कुछ सामाजिक संगठनों और प्रकाशपुन्ज पाण्डेय जैसे कुछ समाजसेवी लोगों ने इन मानसिक रूप से विकृत लोगों और आवारा जानवरों के साथ और भी कई लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्थाएं की थीं लेकिन इस लॉकडाउन में नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए उसे संपूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। ऐसी स्थिति में मानसिक रूप से विकृत लोगों और आवारा जानवरों के संरक्षण और उनके खाने पीने की ज़िम्मेदारी रायपुर नगर निगम को ही लेनी होगी।

अत: मैं रायपुर नगर निगम कमिश्नर और महापौर के साथ ही रायपुर कलेक्टर और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अपील करता हूँ कि मानसिक रूप से विकृत लोगों और आवारा जानवरों के संरक्षण और उनके खाने पीने की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित करने का कष्ट करें।,

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